वर्षों से कांग्रेस के झोली मे खरसिया सीट, ओपी की राह आसान नही

रायपुर। आजाद भारत से लेकर वर्तमान तक खरसिया सीट कांग्रेस के खाते मे जाती रही है। आजतक इस विधनसभा सीट से भाजपा एक भी बार अपनी जीत दर्ज नहीं कर पायी है। वर्ष 1977 में खरसिया को विधानसभा क्षेत्र बनाया गया, तब से लेकर आज तक यह सीट कांग्रेस के झोली में ही रही। खरसिया स्वर्गीय लखीराम अग्रवाल का गढ़ हुआ करता था। एक समय में पूरे अविभाजित मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ भाजपा की राजनीति यहीं से संचालित हुआ करती थी। यह क्षेत्र छत्तीसगढ़ के मंत्री अमर अग्रवाल का गृह क्षेत्र भी है। इसके बावजूद अब तक भाजपा यहां कभी जीत हासिल नहीं कर पाई है।

यदि ओपी चौधरी भाजपा प्रवेश करते है और उन्हें खरसिया विधनसभा से भाजपा मैदान में उतारती है। तो इस बार खरसिया सीट में कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है। क्योंकि इस सीट में अब तक जातिगत समीकरण ही फिट बैठता आया है। ओपी चौधरी मूलरूप से खरसिया विधानसभा के ही निवासी हैं। वह भी अघरिया (पटेल) समाज से हैं। इससे पहले इस सीट में अब तक अघरिया (पटेल) समाज के प्रत्याशियों की ही जीत हुई है। इसके साथ ही कलेक्टर रहते हुए ओपी चौधरी ने कई एेसे काम किए है जिससे वे लोगों के दिलों में अपनी एक अलग ही छवि बनाए हुए है। इसके साथ ही वे युवाओं में एक रोल मॉडल के रुप में अपनी पहचान रखते है। उनकी यही छवि इस बार खरसिया सीट में कांग्रेस को जोरदार टक्कर दे सकते है।

उमेश की छवि भी निर्विवाद – निश्तिच तौर पर यदि उमेश और ओपी आमने सामने हुये तो कस्म्कस देखने को मिलेगा। पिता के मृत्यु के बाद उमेश पटेल ने अपनी छवि एक साफ सुथरे जनप्रतिनिधि के रुप मे बनाई है। और वे लगातार जनता के बीच सक्रिय भी है।

SHARE

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *