कोरोना के खिलाफ इस जंग में मीडिया कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका :- मीडिया सलाहकार रुचिर गर्ग छत्तीसगढ़ के पत्रकारों की आर्थिक स्थिति से अवगत हैं उसके बाद भी पत्रकारों की सुरक्षा के लिए सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया ?

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने कोरोना से लड़ने के लिए विभिन्न स्तर पर अपनी तैयारियां कर ली है पूरा प्रदेश लाकडाउन है। चप्पे चप्पे पर पुलिस तैनात है लोगों की आवाजाही में भी कमी देखी गई है । सरकार ने विभिन्न वर्गों  इस त्रासदी मे लाभान्वित करने के लिए विशेष राहत की योजना बनाई है जो सरानीय है इसमें तकरीबन सभी वर्ग को राहत की सांस मिलेगी।

पत्रकारों के लिये कोई एलान नही :- लेकिन  छत्तीसगढ़ के पत्रकारों के बीच खड़ा होगा बड़ा आर्थिक संकट। इस लड़ाई से पत्रकार और मीडिया संस्थान में कार्य हर एक कर्मचारी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। जिससे कारण प्रादेश और देश के अलग-अलग हर स्थानो से सही जानकारियों का निचोड़ सरकार तक आप आ रहा है । लेकिन इन मीडिया कर्मियों के सामने कुछ दिनों बाद आर्थिक संकट खड़ा होने वाला है। यदि फील्ड में या संस्थानों में काम करने वाले मीडिया कर्मियों को कुछ होता है तो उनके परिवार में घर कौन चलाएगा सरकार को इसका भी ख्याल रखना चाहिए और मीडिया कर्मियों के लिए या फिर में काम करने वाले कर्मियों के लिए एक राहत पैकेज का ऐलान करना चाहिए ताकि पत्रकारों की सुरक्षा और उनके परिवार  की भी आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

मार्केट पूर्ण रूप से बंद है मीडिया कर्मी अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद हैं शासन ने भी मीडिया को काम करने में पाबंदी नहीं लगाई है ।लिहाजा मीडिया कर्मी अपनि ड्यूटी निभाने कार्यालय जा रहे हैं  मीडिया स्थानों के द्वारा इस लड़ाई में साथ दिया जा रहा है लेकिन आखिर कब तक कुछ दिनों बाद  मीडिया संस्थान भी  दम तोड़ने लगेंगे क्योंकि मार्केट पूर्ण रूप से बंद है

 

पूरे मीडिया इंडस्ट्री में आर्थिक संकट के बादल मंडराने लगेंगे- हो सकता है कई पत्रकारों कई मीडिया कर्मियों की नौकरियां भी खतरे में पड जाए। इसके र लिये अभी तक प्रदेश के मीडिया कर्मियों के लिए कोई भी राहत के कार्य नहीं किए हैं । ना ही इस लड़ाई में सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने वाले मीडिया कर्मियो के लिए कोई भी आर्थिक पैकेज या सुरक्षा की घोषणा की गई है । जब मीडिया कर्मियों को काम के लिए रियायत दिया गया है उन्हें फिल्ड़  में जाने के लिए छूट दी गई  है तो उनके लिए सुरक्षा की जिम्मेदरी भी सरकार की है। निश्चित ही प्रदेश सरकार और केंद्र  सरकार को मीडिया कर्मियों के लिये उनके परिवार के लिये एक सहायता राशि निर्धारित करना चाहिये।

 

मीडिया सलाहकार रुचिर गर्ग छत्तीसगढ़ के पत्रकारों की आर्थिक स्थिति से अवगत हैं उसके बाद भी पत्रकारों की सुरक्षा के लिए सरकार ने कोई कदम नहीं उठाए हैं-: 

मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रुचिर गर्ग ने बतौर पत्रकार अपने जीवन का 25 से 30 वर्ष गुजारे हैं उन्हें छत्तीसगढ़ के पत्रकारों की आर्थिक स्थिति तथा जीवन शैली के बारे में भली-भांति ज्ञान है -लेकिन आश्चर्य होता है कि जब हमारे बीच का व्यक्ति कुछ करने की स्थिति में होता है तो तब उसका ध्यान तमाम इन चीजों पर नहीं जा पाता है आखिर क्यू?

रुचिर गर्ग मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को यह सलाह तो दे ही सकते हैं कि छत्तीसगढ़ के पत्रकारों की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है लिहाजा फील्ड में काम करने वाले किसी भी पत्रकार या कार्यालय में काम करने वाले किसी भी कर्मचारी को इस खतरनाक  वायरस का संक्रमण होता है और उसके साथ कुछ ऊंच-नीच होने की स्थिति में उसके परिवार का भरण पोषण कैसे हो पाएगा।

और यदि  खबरों की उपयोगिता नहीं है तो 21 अप्रैल तक मीडिया कार्यालयों को भी बंद करने का आदेश जारी करना चाहिए-  राज्य सरकार ने मीडिया कर्मियों के लिए कोई भी सुरक्षा के लिए कदम नहीं उठाए हैं यदि वायरस का संक्रमण इतना है कि इसे हर कोई प्रभावित हो सकता है तो मीडिया के व्यक्ति भी इससे प्रभावित होंगे हाल ही में भोपाल में कमलनाथ के प्रेस कॉन्फ्रेंस की बात सामने आई है जिसमें एक पत्रकार को कोरोना पॉजिटिव बताया जा रहा है इस स्थिति में यह वायरस किसी भी व्यक्ति के माध्यम से कहीं भी पहुंच सकता है लिहाजा 21 अप्रैल तक मीडिया संस्थानों को भी बंद करने के आदेश देने चाहिए या पत्रकारों के लिए आर्थिक सुरक्षा की घोषणा की जानी चाहिए।

पत्रकारों के प्रति संवेदनशील है मुख्यमंत्री भूपेश बघेल:– प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल का पत्रकारों के प्रति एक अलग प्रेम और स्नेह है वे भलीभान्ति अवगत है कि पत्रकार सदैव अपनी ड्यूटी पर तैनात रहते हैं ।वह समाज के साथ-हर मोर्चे पर लड़ाई लड़ते रहते हैं निश्चित ही यदि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का ध्यान आकर्षित कराया जाए तो पत्रकारों के परिवार की सुरक्षा के लिए एक राहत मील सकती हैं ।

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