कोरोना को ध्यान में रखते हुए 15 अप्रैल से रेलों के संचालन के तौर-तरीके पर विचार

  1. दिल्ली। चेयरमैन रेलवे बोर्ड के साथ बोर्ड सदस्यों की हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक में कोरोना को ध्यान में रखते हुए 15 अप्रैल से रेलों के संचालन के तौर-तरीके पर विचार किया गया। कई मुद्दों पर सहमति बनी हुई है ताकि महामारी को किसी भी रूप में ट्रेन यात्रा के कारण बढ़ने का मौका न मिले।.इसमें एक प्रस्ताव स्लीपर और थर्ड एसी के मिडिल बर्थ किसी को भी अलॉट न करने का है ताकि सोशल डिस्टेंसिंग कायम रखा जा सके। कई अन्य सुझावों पर भी विचार किए गए जिन्हें नीचे दिया जा रहा है. इस पर अंतिम मुहर जल्द लगने की संभावना है. 14 अप्रैल के बाद रेल्वे इन नियमों के साथ रेलयात्रा करने की अनुमति दे सकता है जो इस प्रकार हैं.
    .सरकार मामलों की संख्या के आधार पर देश को 3 क्षेत्रों में विभाजित करने की सोच रही है, लाल, पीले और हरे। रेड ज़ोन में कोई परिवहन सेवाएं शुरू नहीं की जाएगी, पीले में 3. प्रतिबंधित सेवाएं होंगी और हरे रंग की सेवाओं की संख्या में कोई प्रतिबंध नहीं होगा।
    . ट्रेनों में सोशल डिस्टेंसिंग को बनाए रखने के लिए स्लीपर और थर्ड एसी में मिडल बर्थ का आवंटन नही होगा.
    . रेलगाड़ियों में चददर तकिया और पर्दो का इस्तेमाल नही होगा तथा खाना भी नही दिया जाएगा.
    . पहले से निर्धारित को समयानुसार रद्द किया जाएगा और केवल विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी.
    . रेल्वे स्टेशन पर सभी प्रवेश बिंदुओं पर थर्मल स्क्रीनिंग की जाएगी
    . 60 से ऊपर के यात्रियों को यात्रा करने की अनुमति नहीं
    . सभी यात्रियों को मास्क पहनना अनिवार्य होगा. मास्क नहीं पहनने पर जुर्माना लगाया जा सकता है।
    .कोई अनारक्षित यात्रा की अनुमति नहीं दी जाएगी. सिर्फ आरक्षित लोग ही यात्रा कर पाएंगे. यह आवश्यक है क्योंकि अनारक्षित व्यक्ति का कोई विवरण सरकार नही ले सकती. खासकर डब्ल्यू टी चलने वाले लोगों का.
    . जिन शहरों में कोरोना हाटस्पाट है, वहां ट्रेने नही रोकी जाएंगी.
    .ट्रेनें चलाने के पहले राज्य सरकारों से भी बात की जाएगी.
    .रेलवे द्वारा यह भी सुझाव दिया गया है कि क्या सिर्फ राज्यों के अंदर ही ट्रेने चलाई जाएं ताकि कोरोना का प्रसार ना हो सके.
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