पूरी सरकार प्रायवेट स्कूल मे, गांव- गरीब के बच्चे टूटी-फूटी , शिक्षक विहीन स्कूल मे पढ्ने के लिये मजबूर

रायपुर! प्रदेश का हर नागरिक आज अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा देना चाहता है। सरकारें भी आाती हैं तो शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार उनका मूल उद्देष्य होता है। लेकिन आज शहर के अखबरों को देखकर ऐसा लग रहा है कि अब षिक्षा सिर्फ धनाढ्य लोगों के बच्चों तक ही सीमित रह जाएगी। और गरीब, मजदूर का बच्चा सिर्फ टुटी-फूटी सरकारी स्कूलों, माध्यान भोजन तथा षिक्षको के आभाव में शिक्षा के लिए ऐसे ही संघर्ष करते रहेगा।

आज शहर के विभिन्न अखबारो में  आरंग रोड स्थित फाइव स्टार स्कूल व्यंकटेष्वर सिग्नेचर पब्लिक स्कूल के द्वारा छापे गए विज्ञापन में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, स्कूल षिक्षा मंत्री, समेत सरकार के सरकार के सभी मंत्रियों का नाम शामिल है। निष्चित तौर पर नाम बिना सहमति के नहीं छापा गया होगा। जब पूरी सरकार ही प्रायवेट स्कूलों में इस तरह से सिरकत करेगी तो शिक्षा का निजीकरण तेजी से होगा और हमारे प्रदेश की सरकारी स्कूलें ऐसे ही दम तोडती नजर आयेगीं। जाहिर सी बात हैं इन स्कूलों की फीस गांव, गरीब और मजदूर नहीं पटा सकता , उनके बच्चों को मजबूरी में सरकारी स्कूलों में पढना पडता है। आजतक कभी भी किसी सरकारी स्कूल के उदघाटन में पूरा मंत्रिमण्डल शिरकत नहीं किया लेकिन इस स्कूल के उट्घाटन के विज्ञापन को देखकर साफ तौर पर देखा जा सकता है कि प्रदेश सरकार का प्रायवेट स्कलों के प्रति किस तरह से बढावा दे रही है।

 1000 से अधिक शिक्षको का ट्रान्सफर-

प्रदेश में षिक्षको का आभव तो है ही इससे तो हर वर्ग अवगत है। वहीं विगत एक वर्ष में हजारो शिक्षको का स्थानान्तरण किया जा चुका है कुछ ने ज्वाइन किया तो कुछ अपनी अर्जी लेकर मंत्रियों के चक्कर काट रहें हैं लेकिन किसी मंत्री तथा अधिकारी को इन तमाम बातों से कोइ्र लेना -देना नही ंक्योंकि सरकारी स्कूलों में तो गांव-गरीव का बच्चा ही पढ रहा है जो अपने षिक्षा के के लिए आवाज नहीं उठा सकता और न ही इन धनाढ्य स्कूलों में अपने बच्चों को पढा सकता है।

मांगों को लेकर षिक्षक आन्दोलन पर-

प्रदेश की सरकारी स्कलों की भला शिक्षा व्यवस्था केसे सुधरेगी अतिथि शिक्षक आये दिन राजधानी रायपुर कूच कर रहें हैं अपने नियमितीकरण के लिए आन्दोलन कर रहे हैं, संविदा षिक्षक भी सडको में उतरकर सरकार को उनका वचन पत्र याद दिला रहे हैं लेकिन कोई सुध लेने वाला नहीं है। भला कैसे सुधरेगी गांव -गरीव के बच्चों को दी जाने वाली शिक्षा।

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