बड़ी खबर:- संविदा कर्मचारियों के 90 % वेतनमान तथा नियमितीकरण का मामला अब विधानसभा में गूंजेगा, मुख्यमंत्री शिवराज को देना पडेगा जबाब

भोपाल! मध्य प्रदेश सरकार के द्वारा सामान्य प्रशासन  विभाग के आदेश में 5 जून 2018 को प्रदेश में कार्यरत सभी विभाग के संविदा कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों के समकक्ष 90% वेतन तथा नियमित कर्मचारियों की समान सभी सुविधा देने का आदेश तथा विस्तृत नीति निर्देश जारी हुआ था । लेकिन प्रदेश में कार्यरत लाखो की तादात में संविदा कर्मचारी का शोषण सभी विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कर रहे हैं विभागध्यक्ष शासन की नीति को कचड़े के डब्बे मे डाल दिया है । प्रदेश में कार्यरत संविदा कर्मचारियों को अभी तक 90% वेतनमान  नहीं दिया गया है। जिसके कारण कर्मचारियों में अच्छा खासा रोष व्याप्त है.

अब यह मामला मध्य प्रदेश के विधानसभा में गूंजेगा सदस्य इंजीनियर लारिया द्वारा तारांकित प्रश्न क्रमांक 72 में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री से प्रश्न के माध्यम से जवाब मांगा है. सदस्य ने अपने प्रश्न में पूछा है कि के मध्य प्रदेश सामान्य प्रशासन विभाग के द्वारा आदेश जारी करने के बाद भी आज 2 वर्ष बीत चुका है लेकिन प्रदेश में कार्यरत संविदा कर्मचारियों को अभी तक 90% वेतनमान नहीं दिया जा रहा है. विभागों के द्वारा उक्त नीति निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है. इसके लिये कौन उत्तरदाई है नीति निर्देशों की प्रति भी सदस्य ने मांगा है.।

वही तारांकित प्रश्न क्रमांक 487 में एक और सदस्य ने शरदेंदु तिवारी ने मुख्यमंत्री से विधानसभा के माध्यम से प्रश्न पूछा है.

शासन के द्वारा कर्मचारियों को 90% वेतन देने का निर्णय लिया गया है ? यदि निर्णय लिया गया है तो यह नियम कब से लागू है। कर्मचारियों को कब से वेतन प्रदान किया जा रहा है।

निश्चित तौर पर विधानसभा में इन प्रश्नों पर सरकार की किरकिरी होने वाली है। मध्य प्रदेश सरकार , सामान्य प्रशासन विभाग ने जून 2018 को आदेश तो जारी कर दिया।  लेकिन लाखों की तादात में संविदा कर्मचारियों का आज भी उनके विभाग के अधिकारियों द्वारा शोषण किया जा रहा है संविदा कर्मचारी आधे से कम वेतन मे कार्य करने के लिए विवश है।

अभी तक मध्य प्रदेश में किसी विभाग के संविदा कर्मचारियों को 90% वेतनमान नहीं दिया जा रहा है ना ही किसी भी प्रकार की नियमित नौकरी प्रदान की गई है अन्य सुविधाओं के लिए भी संविदा कर्मचारी दरबदर भटक रहे हैं ।मध्यप्रदेश में करोना संक्रमण से लड़ रहे स्वास्थ्य कर्मियों का बुरा हाल है स्वास्थ्य कर्मियों को हर कार्य में ड्यूटी लगा दी जाती है। लेकिन वेतन के नाम पर उन्हीं विभाग के जिम्मेदार अधिकारी शोषण कर रहे हैं। सरकार के आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं। मध्यप्रदेश में हजारों की संख्या में कार्यरत   एएनएम घर घर जाकर टीकाकरण, कोरोना संक्रमण की रोकथाम की जानकारी ,  एनसीडी,  जन संख्या स्थिरीकरण, ऐसे सैकड़ों कार्य कर रहीी हैं लेकिन विभाग के उदासीन रवैया के कारण उन्हें महज ₹10000 के वेतन में काम करना पड़ रहा है। सरकार 90 % वेतनमान का ढिंढोरा पीट कर वाहवाही लूट रही है।

ऐसे में प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था कैसे सुधरेगी। निश्चित तौर पर स्वास्थ्य कर्मी कोरोना संक्रमण के इस घोर महामारी में भी अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा से कर रहा है लेकिन वही जिम्मेदार अधिकारी  संविदा में कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों का शोषण कर रहे हैं।

 

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