कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की यह योजना दुनिया का सबसे बड़ा कल्याणकारी योजना होगा

नयी दिल्ली, अर्थशास्त्रीयो का मानना है कि कांग्रेस की सरकार बनीं तो यह योजना लागू हुआ तो दुनिया का सबसे बड़ा कल्याणकारी योजना होगा , हर साल 5 करोड़ परिवारों को 72,000 रुपये सालाना देने का मतलब यह है कि इससे सरकारी खजाने पर करीब 3.6 लाख करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा. यह अगले वित्त वर्ष यानी 2019-20 के लिए तय कुल 27,84,200 करोड़ रुपये के बजट का करीब 13 फीसदी है.

यही नहीं, यह 2019-20 के बजट में नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा केंद्र प्रायोजित योजनाओं जैसे मनरेगा, स्वच्छ भारत अभियान, नेशनल हेल्थ मिशन, राष्ट्रीय साक्षरता अभियान आदि के लिए कुल प्रस्तावित 3.27 लाख करोड़ रुपये के बजट से भी ज्यादा होगा. यह भारत के कुल जीडीपी का करीब 2 फीसदी हिस्सा होगा. इसका मतलब यह है कि वित्तीय अनुशासन के रास्ते पर भारत या तो पिछड़ जाएगा या इसके लिए दूसरी कल्याणकारी योजनाओं के संसाधन में भारी कटौती करनी पड़ेगी.

राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस सरकार सत्ता में आई तो यह योजना कई चरणों में लागू की जाएगी. राहुल ने कहा कि कांग्रेस ने इस योजना के वित्तीय प्रभावों का अध्ययन किया है और इसको अंतिम रूप देने से पहले देश के प्रमुख अर्थशास्त्रियों तथा एक्सपर्ट से 4-5 महीने तक कई दौर में परामर्श लिया है.

राहुल ने कहा कि महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार योजना से देश में 14 करोड़ लोगों को गरीबी के दुष्चक्र से बाहर रखने में मदद मिली है. और आज जिस न्याय योजना की कांग्रेस ने घोषणा की है, वह गरीबी उन्मूलन का दूसरा प्रयास होगा.

वैसे यह योजना लागू तब होगी जब कांग्रेस सत्ता में आती है. लेकिन वास्तव में अगर कांग्रेस सत्ता में आई और उसने इसे लागू कर दिया तो यह दुनिया की सबसे बड़ी कल्याणकारी योजना साबित हो सकती है. 25 करोड़ की जनसंख्या का मतलब है पूरे एक इंडोनेशिया जैसे देश के बराबर. इसके पहले इतने बड़े पैमाने पर दुनिया में कहीं भी यूनिवर्सल बेसिक इनकम या न्यूनतम आय गारंटी की योजना लागू नहीं की गई है.

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