मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ के कोल ब्लॉक आवंटन के संरक्षण हेतु प्रधान मंत्री को लिखा पत्र

रायपुर 12 अप्रैल 2019। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कोल ब्लाक आवंटन में छत्तीसगढ़ के हितों के संरक्षण की मांग की है। तीन पन्नों के इस पत्र में मुख्यमंत्री विस्तार से कोल ब्लाक आवंटन को लेकर केंद्र सरकार की नयी नीति से छत्तीसगढ़ को होने वाले नुकसान व रायल्टी की हानि का जिक्र किया है। मुख्यमंत्री ने लिखा है कि 2014 के बाद से जो नीति बनी है, उससे छत्तीसगढ़ को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

2014 में छत्तीसगढ़ में कुल 42 कोल ब्लाक थे, जिनमें से 7 कोल ब्लाक छत्तीसगढ़ व 9 कोल ब्लाक अन्य राज्यों के सार्वजनिक उपक्रमों को आवंटित किया गया था। इसके अलावे 24 कोल ब्लाक निजी उपक्रमों और 2 संयुक्त उपक्रमों को आवंटित किये गये थे। छत्तीसगढ़ के हिस्से के 7 ब्लाकों से 2600 मिलियन टन कोयला उपलब्ध था। 2014 से पहले कोयले पर सरकार को रायल्टी मिलता था, लेकिन 2014 में बदली नयी कोयला नीति के बाद राज्य के लिए रायल्टी के साथ प्रीमियम की व्यवस्था कर दी गयी।

2014 में नयी कोयला नीति में केवल राज्यों के सार्वजनिक उपक्रमो- विद्युत कंपनियों के लिए कोल ब्लाक आवंटन की व्यवस्था की गयी। लेकिन नयी आवंटन नीति में छत्तीसगढ़ के कोल ब्लाक की संख्या 7 से घटकर 3 हो गयी। वहीं स्टाक 2600 मिलियन टन से घटकर सिर्फ 660 मिलियन टन रह गया। यही नहीं 42 कोल ब्लाक में सिर्फ 15 कोल ब्लाक को ही आवंटित किया गया, जिनमें से एक ब्लाक रद्द हो गया।

यहीं रायल्टी के अतिरिक्त प्रीमियम की वजह से भी छत्तीसगढ़ को बड़ा नुकसान हुआ। पत्र में लिखा है कि 2015 में अतिरिक्त प्रीमियम की व्यवस्था से उपक्रमों में 2291 से बढ़ाकर 3502 प्रतिटन की बोली लगी, जिसमें महज भारत सरकार ने 100 रुपये प्रति मीट्रिक टन की प्रीमियम की व्यवस्था की गयी। जाहिर है अन्य राज्यों को आवंटित ब्लाक के कुल भंडार  3700 मिलिटन टन पर छत्तीसगढ़ को सिर्फ 100 रुपये प्रति टन का प्रीमियम मिला होगा। पत्र में मुख्यमंत्री ने लिखा है कि प्राइवेट सेक्टर की तरफ से बोली के आधार पर 2500 प्रीमियर प्रति टन की स्वीकृति दी जाती तो आदिवासी बहुल इलाकों में अतिरिक्त आय होती। इसे लेकर छत्तीसगढ़ को 9 लाख करोड़ का नुकसान हुआ है।

यही नहीं पत्र में सीएम भूपेश ने इस बात को लेकर ऐतराज जताया है कि आवंटन प्रक्रिया में भी राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं रखी गयी है, राज्य खनन को लेकर किसी तरह का कोई फैसला नहीं ले सकता

भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री को इस बाबत कुछ सुझाव भी दिये हैं। उन्होंने लिखा है कि ..

कोल ब्लाक आवंटन में राज्य की सहमति का प्रावधान किया जाये।

अन्य राज्यों को आबंटित ब्लाक में भी बोली के आधार पर प्रीमियर की व्यवस्थी का जाये, प्रीमियम की राशि 100 रुपये प्रति टन से बढ़ाकर कम से कम 500 रुपये प्रति टन किया जाये।

अन्य राज्यों की विद्युत इकाईयों से छत्तीसगढ़ को सस्ते कोयले के एवज में उत्पादित विद्युत का हिस्सा दिया जाये।

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