शिवराज मामा का मामू बनाने वाला आदेश:- स्वास्थ्य विभाग ने संविदा कर्मचारियों को 2 साल बीत जाने के बाद भी नही दिया 90 प्रतिशत वेतन, वित्त विभाग ने भी जारी किया पत्र, बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारी संघ खफा, लिखा पत्र

भोपाल । मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का दो कार्यकाल बड़ी सहज तरीके से बीत गया । लोकप्रियता भी खूब बढी लेकिन तीसरे कार्यकाल के बाद से शिवराज सिंह चौहान का आदेश मजाक बनकर घूम रहा है! मध्यप्रदेश के संविदा कर्मचारियो मे खुसर- फुसर होने लगी है। की मामा ने  90%  का आदेश तो जारी कर दिया पर विभागाध्यक्ष संविदा कर्मियों को मामू (आदेश का पालन नही कर रहे) बना रहे है।

बहरहाल कारण जो भी हो पर शिवराजसिंह चौहान की सरकार कर्मचारियो के आक्रोश के कारण वर्ष 2018 मे हुये इलेक्शन मे सत्ता गवां दी थी। अब जोड़- तोड वाली सरकार मे शिवराज  एक बार फिर मुख्यमंत्री बन गए हैं। लेकिन जनता मे शिवराज मामा, का मामू बनाने वाला आदेश चर्चा का विषय बना हुआ है।

मध्य प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के द्वारा शासन के आदेश की अवहेलना की जा रही है । लेकिन छवि शिवराज सिंह  की खराब हो रही है। यही हाल रहा तो आगामी चुनाव मे हालात छत्तीसगढ़ की भान्ति  न हो जायें।जहां भाजपा के नेतागण  तक्थापलट  करने की तो दूर विपक्षी सदस्यों की संख्या भी गिनती की बचे।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जून 2018 में सभी विभागों मे कार्यरत संविदा कर्मचारियों को 90% नियमित कर्मचारियों के समकक्ष वेतन देने का आदेश जारी किया था। यह पत्र वित्त विभाग ने भी सभी व विभागों में  विभागाध्य्क्ष को भी भेज चुका है। कुछ विभाग इसका पालन करना भी चालू कर दिये हैं। लेकिन मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत एनएचएम में कार्यरत हजारो  एएनएम  बहन, लैब टेक्नीशियन तथा अन्य संवर्ग में कार्यरत कर्मचारियों को 2 साल बीत जाने के बाद भी 90% वेतन का भुगतान नहीं किया गया।  न हीं उन्हें किसी भी प्रकार की सरकारी नौकरी में प्राथमिकता दी गई । एक तरफ जहां स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत हजारों की संख्या में a.n.m. बहन घर- घर जाकर किल -कोरोना अभियान के तहत मध्य प्रदेश में  कोरोना के खिलाप जंग लड़  रही है, वही  स्वास्थ्य विभाग उन संविदा कर्मचारियों का शोषण करने में पीछे नहीं हट रहा है। मध्य प्रदेश एनएचएम के अंतर्गत  कार्यरत  हजारो एएनएम  महज  10000- 12000 के वेतन में कार्य कर रही हैं । इस घोर कोरोना संकट में घर -घर दस्तक देकर कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहे। लेकिन स्वास्थ्य विभाग मध्य प्रदेश सरकार के आदेश की अवहेलना के साथ-साथ इन कर्मियों के परिवार का भी तनिक ख्याल नहीं  कर रहा ।  हजारों की संख्या में ANM  का भविष्य अंधकारमय दिखाई दे रहा है । क्योंकि संविदा में कार्यरत किसी भी कर्मचारी को कोई सुविधा नहीं दी जाती ना ही उन्हें   ढंग  का वेतन  दिया जाता , और न हीं अनुकंपा नियुक्ति दी जाती।  यहाँ तक मेडिकल की सुविधा रहती है। इसके बाद भी दूरस्थ अंचलों में सुदूर गांव में भी जाकर ANM बहन स्वासथ्य विभाग के हर मिशन को सफल बनाने में रीड की हड्डी की भूमिका निभाती है।

मध्यप्रदेश में  कर्मचारी आक्रोश के कारण शिवराज सिंह चौहान को सत्ता से भी हाथ धोना पड़ गया था।

90% के वेतन भुगतान संबंधित पत्र वित्त विभाग भी सभी विभाग  को भेज चुका है।  उसके बाद भी संविदा कर्मचारियों को उनके हक से वंचित रखा गया है । हाल ही में मध्य प्रदेश बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता संघ ने भी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री तथा स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत संविदा कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों के समक्ष 90% वेतन देने से संबंधित तथा संविलियन करने के लिए पत्र लिखा है।

 

क्या शासन के आदेश पर अफसरशाही भारी पड रही है–  वर्तमान में  मुख्यमंत्री शिवराज  सिंह चौहान कि समझौते वाली सरकार में अफसरशाही जमकर हावी है । आईएएस अधिकारी शिवराज सिंह चौहान के आदेश को कचरे के डब्बे में डाल दिए हैं। 2 साल बीत जाने के बाद भी आज तक स्वास्थ्य विभाग में संविदा में कार्यरत कर्मचारियों के वेतन का भुगतान 90  प्रतिशत नहीं किया।

 

 

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