उत्तर प्रदेश के11विधानसभा सीटो पर चुनावी बिगुल बज चुका है जिसे 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव का माना जा रहा है सेमीफाइनल

उत्तर प्रदेश की 11 विधानसभा सीटों पर चुनावी बिगुल बज चुका है, जिसे 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है. यही वजह है कि बीजेपी, सपा, कांग्रेस और बसपा सहित तमाम राजनीतिक दलों ने ताल ठोक दी है. ऐसे में देखना होगा कि बीजेपी उपचुनाव में भी जीत का सिलसिला बरकरार रखती है या फिर विपक्षी दल दमदार वापसी करते हैं.

सूबे में हो रहे उपचुनाव के जरिए अपने खोए हुए जनाधार को वापस पाने के लिए सपा प्रमुख अखिलेश यादव हरसंभव कोशिश में जुटे हैं, लेकिन उन्होंने इस बार अपने भाई की पत्नी अपर्णा यादव को नजरअंदाज कर दिया है. जबकि रामपुर सीट पर सपा के गढ़ को बचाने के लिए आजम खान की पत्नी तंजीम फातिमा पर दांव लगाया है. ऐसे में सवाल उठता है कि मुलायम कुनबे में क्या सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है,दरअसल यादव परिवार में अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल यादव में काफी झगड़ा है. ऐसा मान जाता है कि परिवार के इस झगड़े में मुलायम सिंह की दूसरी पत्नी साधना यादव शिवपाल का साथ देती हैं. उनकी बहू अपर्णा यादव हालांकि अखिलेश यादव के खिलाफ खुलकर कभी कुछ नहीं बोलती हैं, लेकिन चाचा शिवपाल के लिए सॉफ्ट कार्नर रखती हैं. अपर्णा यादव लोकसभा चुनाव में संभल सीट से चुनावी मैदान में उतरने की राय जाहिर की थी लेकिन पार्टी ने उन्हें तवज्जो नहीं दी थी और एक बार फिर उपचुनाव में भी टिकट काट दिया गया है.

अखिलेश यादव ने रामपुर में आजम खान के दुर्ग को बचाने के लिए उनकी पत्नी तंजीम फातिमा को प्रत्याशी बनाया है. जबकि तंजीम फातिमा अभी राज्यसभा की सांसद हैं और उन्हें 2020 में रिटायर होना था. सपा रामपुर सीट पर कोई रिस्क नहीं लेना चाहती थी. इसीलिए आखिरकार अखिलेश यादव ने भरोसा आजम खान परिवार पर ही किया.

दरअसल रामपुर की सीट सपा और आजम खान दोनों के लिए इज्जत की लड़ाई बन गई है. बीजेपी इस बार हर हाल में रामपुर में कमल खिलाना चाहती है. जबकि आजम की चिंता अपने गढ़ बचाने की है. वो यहां से 9 बार के विधायक हैं. लोकसभा चुनाव में रामपुर ही नहीं, मुरादाबाद और संभल की सीट भी बीजेपी हार गई. आजम ने अपने इलाके में मोदी-योगी की जोड़ी को बेअसर कर दिया था

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