चांदनी बिहारपुर क्षेत्र में आजादी के 71 वर्ष बीत जाने के बाद भी अंधेरे में अपना जीवन यापन करना पड़ रहा है

सूरजपुर | डिजिटल इंडिया को लेकर जोर आजमाइश के बावजूद चांदनी बिहारपुर क्षेत्र में आजादी के 71 वर्ष बीत जाने के बाद भी पण्डो जनजाति को अंधेरे में अपना जीवन यापन करना पड़ रहा है।  यह कैसा डिजिटल इंडिया जो की इन गांव में लाइट ना होने से कैसे होगा मोबाइल चार्जर एक चिंता का विषय बना हुआ है, कैसे होगा छत्तीसगढ़ शासन का मोबाइल संचार क्रांति योजना सफल जहां लाइट भी ना हो वहां कैसे होगा चार्ज मोबाइल।

जिले की दूरस्थ एवं वन अंचल क्षेत्र चांदनी बिहारपुर के ग्राम पचायत कोल्हुआ के आसरित गांव भाटपारा, ग्राम पंचायत उमझर के आसरित गांव जूडवनीयाँ एवं रामगढ़ के आसरित गांव कछवारी में आजादी के 71 साल बीत जाने के बाद भी आज राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र अंधेरे में अपना जीवन यापन कर रहे हैं। वही प्रशासन द्वारा शहरी और ग्रामीण अंचल में सौर ऊर्जा द्वारा लाइट की सुविधा उपलब्ध कराया गया है, लेकिन इन गांव में अभी कोई सुविधा नहीं है।
प्रशासन द्वारा बड़ा वादा किया जाता है, कि हमारे छत्तीसगढ़ में कोई भी अंधेरे में जीवन यापन नहीं कर रहा है उन्हें विद्युत या सौर ऊर्जा द्वारा लाइट वितरण कर उन्हें उजाला में रखा जा रहा है लेकिन 3 ऐसा भी गांव है जो कि आज के 71 वर्ष बीत जाने के बाद भी प्रशासन शासन द्वारा अभी तक राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र अंधेरे में अपना जीवन बिताने मजबूर हैं। प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है, ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि प्रशासन को कई बार शिकायत कि गई, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
भाटपारा जूडवनीयाँ कछवारी में रात होते ही जंगली जानवर का दहाड़ शुरू हो जाता है घर से निकलना मुश्किल हो जाता है, गांव में रात को निकलना मुश्किल हो जाता है वही बच्चों की पढ़ाई भी लाइट ना होने से नहीं हो पाता है वही लाइट न होने से कई परेशानीयों का सामना करना पड़ रहा है इन ग्रामवासियों को।
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